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शुभकामना संदेश

गयाधाम का पितृपक्ष मेला अतिविश्ष्टि है। इस वर्ष यह मेला 05 सितम्बर 2017 से 20 सितम्बर 2017 तक लग रहा है। यह मेला प्रतिवर्ष लगता है और इस अवधि में देश-विदेश सनातन धर्मावलम्बी काफी संख्या में यहाँ आते हैं तथा अपने पितरो की आत्मा की चिर शांति के लिए श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। इसी कारण गयाजी को मोक्षधाम भी कहा जाता है। यूं तो गयाजी के अतिरिक्त और भी कई पवित्र तीर्थ हैं जहाँ व्यक्ति पुण्यार्जन के लिए जाते हैं। किन्तु अन्य तीर्थो और गया तीर्थ में अंतर है। अन्य तीर्थ में जाकर व्यक्ति केवल अपना उद्धार कर सकता है। जबकि गया तीर्थ में अपने पुर्वजों की कई पीढ़ियों को तारने का उसे सुयोग मिलता है।
आज के वैज्ञानिक युग में हमारी पारंपरिक आस्था पहले जैसी नहीं है फिर भी लाखों की संख्या में देश-विदेश के सनातन धर्मावलम्बी अब भी यहाँ पधारते हैं और अपने पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष प्राप्ति का सुअवसर प्रदान करते हैं। गयाधाम के अनेक स्थानों पर विभिन्न श्राद्धवेदियाँ हैं। तीर्थ यात्री इन वेदियों पर जाकर पिंडदान करते हैं। इस कार्य में गयाजी के पुरोहित, पंडा उनकी पूरी सहायता करते हैं। आज के भाग दौड़ वाली जिंदगी में बहुत से तीर्थ यात्री एक दिवसीय तथा तीन दिवसीय पंच दिवसीय श्राद्ध भी करते हैं। इस कार्य में भी गया के पंडे उनका मार्ग दर्शन करते हैं कि वे कब और कहाँ पिंडदान करें। किन्तु इतना तय है कि वे विभिन्न पिण्डस्थलों में विष्णुपद, फल्गु और अक्षयवट प्रमुख हैं। जो भी तीर्थ यात्री आए वे चाहे जितनी दिनों का अनुष्ठान करें, उन्हें इन तीर्थों पर पिण्डदान अवश्य करते हैं। साथ ही उन्हें अपने गयावाल पण्डे से सुफल भी प्राप्त करना पड़ता है। श्राद्ध कर्म की पूर्णाहुति अक्षयवट में अपने पण्डे से सुफल प्राप्त करने के बाद ही होती है।
शास्त्रों के अनुसार गया धाम का कण-कण यथेष्ट पवित्र एवं मोक्षदायी माना गया है। फिर भी जिन विश्ष्ठि स्थानों पर वेदियाँ हंै उनका महत्व सर्वापरि है। पिण्डवेदियों के अलावे गयाजी के सरोवरों का भी विशेष महत्व है। अनेकानेक सरोवरों पर भी पितृ पूजा के अनुष्ठान किये जाते हैं। अतः कहा जा सकता है कि गयाधाम एतिहासिक, पोैराणिक तथा सांस्कृ तिक दृष्टिकोण से ऐसा नगर है कि आज के वैज्ञानिक युग में भी सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
जिला प्रशासन इस वर्ष काफी पूर्व से तीर्थ यात्रियों के आवासन, अन्य सुविधाएँ तथा उनकी समुचित सुरक्षा की व्यवस्था के लिए तैयारी कर रहा है ताकि जो भी तीर्थयात्री यहाँ आयें, उन्हें अपनी पितृ-पूजा के अनुष्ठानों को संपन्न करने में किसी प्रकार की कोइ कठिनाई न हो। जिला प्रशासन के द्वारा आने वाले सभी तीर्थ यात्रियों की सफल यात्रा के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई है। इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी www.pinddaangaya.in तथा हेल्पलाईन नंव्म् 9304401000 से भी प्राप्त की जा सकती है। इस कड़ी में Pinddaan Gaya नामक एक Android Mobile App and iOS Mobile App भी अलग से उपलब्ध है जिसे Website अथवा Google Play Store and APP Storen से Download किया जा सकता है।

शुभकामनाओं के साथ

कुमार रवि, भा. प्र.से
जिला पदाधिकारी, गया।
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